ARTICLE 15

Article 15 of the constitution states that no person shall be discriminated on the basis of religion, race, caste, sex or place of birth. Every person shall have equal access to public places like public parks, museums, wells, bathing ghats, etc. However, the State may make any special provision for women and children. Special provisions may be made for the advancements of any socially or educationally backward class or scheduled castes or scheduled tribes.

I am inspired by Article 15 movie and I wrote some lines about Indian society.

समाज का कडवा सच या तेरा हक!!

आज मरने से तेरा कोई कल नही,
हैवानियत से बनता कोई बल नही,
कुछ इनसान हैवान सा खुन पीते है,
ये अमृत जल नही,
उनका क्या जाता है, खुन या पानी दोनों का उनको मल नही!

जात की क्या बात है,
उन हैवानों की यही तो औकात है!
लडकी को छुते वक्त उनको दिखती नही जात है, समाज में उनके नाम की बडी-बडी बात है,
खता इस बात की है की, ये भटकी आवाम क्युँ उनके साथ है?

रात तेरी काली है, तो क्या हुआ, सुबह तेरी उजाली है,
जब तु हक से जीयेगा, तभी तो तेरी आझादी है,
जला ले आग दिल में इंसाफ की, क्युँकि आनेवाली इनकी बरबादी है,
अब क्या डरना इनसे, संविधान से तेरी रखवाली है!

भुले-भटके चम्तकार से लोगों में बनती जुदाई की दिवार है, कुच लोगों की नियत ही बेकार है,
अधिकार से मिटाना समाज का अंधकार है,
क्या करे हाथ पर हाथ धरे बैठती हमारी खोखली सरकार है,
सवाल करना जरुरी है, क्युँकि हम इसके हकदार है!

हम मिट्टी से बने है,
मिट्टी में ही जायेंगे,
क्या करेंगे जात को लेके,
क्या करेंगे धरम को लेके,
हम इनसान है, इनसान ही रहकर मर जायेंगे!!

“We are Indians firstly and lastly,” by Dr. B. R. Ambedkar.

PERIODS AND PADMAN

Happy international women’s day to all my readers, friends, sisters, brothers, teachers and my mentors.

Padman

There is a man who known as a Padman of India, his name is Arunachalam Muruganantham. He is a social entrepreneur from Coimbatore, Tamil Nadu. He invented a low cost machine to make sanitary pads. His mission is to provide sanitary napkins at low cost to women who are living in rural India. Now he is successfully doing this great job across India. I am inspired by his work for society and I wrote a poem, it’s periods.

Periods

People think that having periods is bad,
This negative thinking of people make me sad,
But I don’t worry, I have my backbone and she is my mom,
She always makes me to feel warm.

During periods because of bleeding we face bad pain,
People think that it’s only a vain,
People know that puberty is a natural thing,
Then why they behave like they are insane.

People talk about gender equality but, as puberty comes, they don’t think about our dignity,
Menstruation is pure but, it’s not accepted by thoughtless society,
Because of superstition there is an increase in scarcity of humanity.

Because of some taboos we face oppression,
Why people don’t kill stressful traditions,
Why people blindly believe on superstition,
Why they don’t believe on education.

We should think and work like a Padman, We have to support women like Superman, Prove this to be a brave man, be a true man.


सरहदें!!!

सरहदें ये बस कुछ लकीरों का नाम है,
सुबह की रोशनी से ढलती हुई शाम है,
मिलजुलकर रहना अपना काम है,
भारतीय जवानों का सबको ये पैगाम है!

लोगों ने कर लिया है ये फैसला,
सरहद के पार कोई नही है अपना,
गलतफेमियों की वजह से पता नही कब,
सुलझेगा देश-देश में का ये जुदाई का मसला!

जवान करे देश के लिए अपनी जान कुरबान,
क्युँ लोग हो रहे है देश से बेईमान,
निर्दोष लोग आतंकवाद की वजह से हो रहे है लहुलुहान,
न जाने कब होगा खुदा इन राष्ट्रों पर मेहरबान!

बगावत खत्म करना अब बन गई है जरुरत,
ताकत को बढाना बन गई है फितरत,
इज्जत के सवालों ने नष्ट कर दी है शराफत,
नफरत इतनी बढ गई की कोई भी नही है सलामत!

फेक दो ये जानलेवा हथियार राहत मिलेगी,
देश-देश में भाईचारा बढायों मोहब्बत बढेगी,
एक साथ आगे बढनें से बरकत मिलेगी,
एकता में रहने से समानता बढेगी!

सरहद को हटाकर देश को एक करना ही देश का नाम है,
जब सब एक हो जाए, उसमें ही देश का सन्मान है,
एेसे देश को पुरी दुनिया का सलाम है!

Border


शायद वो तुम ही हो!!

जिसके ख्वाबों में, मैं जिता हुँ, उसका गम मैं पानी की तरह पीता हुँ, जिसकी तसवीर को मैं तकता रहता हुँ, उसकी मुसकान देखकर मैं पीघल जाता हुँ, शायद वो तुम ही हो!

जिसका मैं बेसब्री से इंतजार करता हुँ, उसके एेतबार के लिए खुदा से दुआ करता हुँ, जिसके प्यार के लिए मैं बेकरार हुँ, उसके लिए मैं अपनी जा-निसार करता हुँ, शायद वो तुम ही हो!

जिसकी बातें याद करके मैं मन-ही-मन मुस्कुराता हुँ, उसकी महफील में, महज बेजुबान बनकर रह जाता हुँ, जिसकी खुद से ढेर सारी बातें करता हुँ, उसके सामने खामोश सा हो जाता हुँ, शायद वो तुम ही हो!

जिसकी निंदों में, मैं जागता हुँ, उसके अश्कों से रोता हुँ, जिसके जख्म पर मैं मरहम लगाता हुँ, उसका मैं दिवाना बनता फिरता हुँ, शायद वो तुम ही हो!

जिसकी अहसासों की दुनिया में, मैं अपना गुजारा करता हुँ, उसकी नजरों से मैं हमेशा दुर ही रहता हुँ, जिसकी नामौजुदगी को मैं बीताए लम्हें में महसुस करता हुँ, उसकी सलामती के लिए भगवान से गुजारीश करता हुँ, शायद वो तुम ही हो!

Happy Valentine’s day

शायद नही यार, वो तुम ही तो हो, जिसकी वजह से मैं मुस्कुरा रहा हुँ, जिसकी वजह से मैं जी रहा हुँ, जिसकी वजह से मैं आगे बढ रहा हुँ!!!

तु Soldier है, Roar कर!!

Indian Soldiers

आतंकवाद देश में बढने लगा है, अब सब का मुँह बोलने लगा है, तेरा खुन खाैलने लगा है, उसे खत्म करने के लिए तु जीत के शिखर पर चढने लगा है!

बारूद से खेलना तेरा काम है, जिंदगी की जग्दोजहस से कहा तुझे आराम है, ‘ मैं जरूर लौट आऊँगा,’ ये माँ के लिए तेरा पैगाम है, वतन का रखवाला है तु, यही तो तेरा नाम है!

देशप्रेम का बीज तुझे बोना है, तेरी जान हमारे लिए सोना है, तुझे लढाई के सफर में सफल होना है, और तुझे दुश्मनाें कों हत्यारों सें धोना है!

तु भारत की मिट्टी से बना एक पहलवान है, तु माँ की शक्ती से हो गया बलवान है, तु खुद की सलतनत का एक सुलतान है, हमें गर्व है तुझपे, क्युँकी तु भारत का जवान है, अब जवानों का जंग के लिए एेलान है!

ये नया हिंदुस्तान है, ये सहेगा नही, ये डरेगा नही, ये मिटेगा नही, ये सिधा ठोकेगा!!

HOW’S THE JOSH? HIGH SOLDIER!!

आज की नारी

जो हमारे चेहरों पर प्यारी सी मुसकान लाएे, जो डरे को आत्मविश्वास दिलाए, जो बच्चों को शिक्षा दिलाए, जो युवायों को देश का भविष्य बनाए, ऐसी प्यारी शिक्षिका हो तुम!

जो अपने नृत्य से सबको मंत्रमुग्ध कराए, जो अपने हाव-भाव से सबको आवाक् कराए, जो अपने शृंगार से सबको मोह में डाले, जो अपने कला से खुद का नाम बनाए, ऐसी होनहार नर्तिका हो तुम!

जो पुरूषों के खेल में खुद को आगे बढाए, जो बाहरी तानों और सवालों को अपने बल्ले से दुर भगाए, जो युवा लडकीयों को खेल-कुद में आगे बढने की प्रेरणा दिलाए, जो खेल-कुद में अपने देश का नाम रोशन कराए, ऐसी हार न माननेवाली खिलाडी हो तुम!

जो चुला-चौंकडी छोडकर खुद का नया व्यापार चलाए, उस व्यापार में महिलाआें को शामील कराए, जो पुरूषों कों उनकी संस्थान में काम दिलाए, जो अपने दमपर सफलता का रास्ता बनाए, ऐसी होशियार महिला व्यापारी हो तुम!

जो आसमान में उम्मीद की उडान लगाए, जो आझाद पंछी की तरह आसमान की सैर कराए, जो अंतरीक्ष में जाकर, सारे जग में अपने देश का नाम ऊँचा कराए, जो देश के लिए अपनी जान कुरबान कराए, ऐसी नीडर अंतरीक्ष यात्री हो तुम!

जो अपने हाथों में मेहंदी की जगह बारूद लगाए, जो दुश्मनाें कों खतम करने की कसम खाए, जो अपने वतन के लिए राझी हो जाए, जो अपनी धरती माँ को तबाह होने से बचाए, ऐसी आग उगलनेवाली सैनिका हो तुम!

जो सरकार की दलदल में अपना कदम बढाए, जो इस दलदल को सफलता का तालाब बनाए, जो महिलाआें के सबलीकरण के लिए आगे आए, जो पुरूषों के साथ मिलकर देश को प्रप्रगतीपथ पर आगे बढाए, ऐसी आत्मविश्वासी सरकारी महिला हो तुम!

आज की नारी, पड रही है सब पे भारी, अब जान रही है जनता सारी!

THE SCOURGE OF GIRLS

One day, I was reading a newspaper early in the morning. There was a news of gangrape of 24-year-old women by her friends in Delhi. I read that news and it made me numb. That was a barbaric act done by her friends. Condition of girls is very bad in India. In rural areas girls face sexual exploitation, religious practices, social stigma, child marriages, domestic violence and other social problems. These social problems of girls leads to women trafficking in India.

In rural areas social stigma is a major problem. In Indian society, social stigma is associated with divorced, widowed, sexual abused women and young girls. Indian society does not accept girls who are sexually abused. People think that they are unholy, but they don’t think about their feelings and situation. This is the reason that girls think in the negative way and this negative thinking leads to painful depression. They don’t tolerate this painful depression and they suffer from it. Another major problem in rural areas is religious practices. Under religious practices unwilling girls become devdasi. This devdasi system contributes to the growth of prostitutes. Girls belonging to the lower castes are encourage to accept devdasi as a way of life. In rural areas, girls are not allow to take education after 9 and 10th standard. They get married at early age and because of this they don’t get opportunity to complete their education. They get stuck in critical problems and they can’t complete their aspirations and dreams because of lack of education.

Also in urban cities like Mumbai, Delhi and Kolkata girls are not safe. These cities are most developed cities of our country, these are becoming worst for girls because of gangrapes. Gangrapes are increasing day by day because of negative thinking of people about girls. Girls are not made for men services. They are not our assets. Because of these problems, girls think that they are hapless, they don’t have bright future. Why do they think like this?, what are the reasons behind it? We are not aware of root cause of their problems or may be we are? These problems of girls make me sage to kill devils who abuse girls. When all this will stop? Don’t we have answer? We can change this situation, if we change our mindset about girls, if we stop the traditional practices, those are painful for girls.

We have to give equal opportunities to women to complete their wants. We have to respect them. We have to give equal rights to them. We won’t able to come in the world without them. We don’t have certain identity without them. If we want to make our country strong, our women have to be more strong. Girls are roaring with this line: Hmaraa time kab aayega?

हमारा टाईम कब आयेगा?

अपनी दो मिनट की खुशी के लिए वे हमारी जिंदगी बरबाद कर देते है, जीस्म पर लगे घाव भर जाते है, लेकीन मन और दिमाख पर लगे घाव कभी भर नही पाते हैं, किसी अजनबी से हम हमेशासेही डर जाते है, हमारी आँखें हरपल दर्दभरे आसुवों से आते हैं!

मन मे क्रुरता भरा हुआ वो राक्षस हमारी और हवस की नजरों से देखता है, हमारा मन उसे जिंदा जलाने के लिए हमेशा दहकता है, और लोग कहते है, हमारी वजह से लडको का मन बहकता है, अब हमारी जिंदगी में वो खुशी देनेवाला फुल भी नही महकता है!

समाज में लोग कहते है, अभी तक तुम्हारी बेटी कुवारी है, इस एक सवाल से दुर हो जाती है हमारी खुशियों की अलमारी, उस पल से सुरू होती है, हमारी बेबस जिंदगी की सवारी, क्युं खतम नही होती है, ये इन्सानियत को खतम करनेवाली बीमारी!

हमें कब समाज में मान मिलेगा?, हमें कब पुरूषों के समान माना जायेगा?, हमें सताने का ये सिलसिला कब खतम होगा?, हमें कब इंसाफ मिलेगा?, न जाने हमारा टाईम कब आयेगा?

“I measure the progress of a community by the degree of progress which women have achieved.” By Dr. B.R. Ambedkar