सरहदें!!!

सरहदें ये बस कुछ लकीरों का नाम है,
सुबह की रोशनी से ढलती हुई शाम है,
मिलजुलकर रहना अपना काम है,
भारतीय जवानों का सबको ये पैगाम है!

लोगों ने कर लिया है ये फैसला,
सरहद के पार कोई नही है अपना,
गलतफेमियों की वजह से पता नही कब,
सुलझेगा देश-देश में का ये जुदाई का मसला!

जवान करे देश के लिए अपनी जान कुरबान,
क्युँ लोग हो रहे है देश से बेईमान,
निर्दोष लोग आतंकवाद की वजह से हो रहे है लहुलुहान,
न जाने कब होगा खुदा इन राष्ट्रों पर मेहरबान!

बगावत खत्म करना अब बन गई है जरुरत,
ताकत को बढाना बन गई है फितरत,
इज्जत के सवालों ने नष्ट कर दी है शराफत,
नफरत इतनी बढ गई की कोई भी नही है सलामत!

फेक दो ये जानलेवा हथियार राहत मिलेगी,
देश-देश में भाईचारा बढायों मोहब्बत बढेगी,
एक साथ आगे बढनें से बरकत मिलेगी,
एकता में रहने से समानता बढेगी!

सरहद को हटाकर देश को एक करना ही देश का नाम है,
जब सब एक हो जाए, उसमें ही देश का सन्मान है,
एेसे देश को पुरी दुनिया का सलाम है!

Border


10 thoughts on “सरहदें!!!

  1. Very thoughtful of you to think of brotherhood in this wave of revenge in India .your poem speaks of a true Indian who thinks of humanity first .
    Keep it up .
    All the best .

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s